इस विलंब से जहां एक ओर बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार में बाधा उत्पन्न हो रही है, वहीं परियोजनाओं का समय और लागत भी बढ़ रही है।