आदेश में कहा गया कि जीवन के अंतिम पड़ाव में वयोवृद्ध माता-पिता को अपनी ही स्वअर्जित संपत्ति में शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन जीने का पूर्ण वैधानिक अधिकार है