संगठन का दावा है कि इस संबंध में पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रशासन को ज्ञापन दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी आपत्तियों और मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।