दिल्ली विधानसभा परिसर में बुधवार को राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद 2026 का आयोजन किया गया। सोनिंग टुडे, ग्रोइंग टुमारो थीम पर हुए कार्यक्रम में 7 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों ने हिस्सा लिया। बच्चों ने विधायकों की सीटों पर बैठकर पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और जिम्मेदार नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आज जिस पर्यावरण की रक्षा की जाएगी, वही बच्चों का भविष्य तय करेगा। आने वाली पीढ़ियां संरक्षण के लिए धन्यवाद करेंगी या लापरवाही पर सवाल उठाएंगी। उन्होंने बच्चों के अनुशासित और ज्ञानवर्धक संवाद की सराहना करते हुए कहा कि बाल संसद ने देश की विधायी संस्थाओं के सामने एक उदाहरण पेश किया है। गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में तर्क, संवाद और एक-दूसरे को सुनने की भावना से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है। आज विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस अवसर पर विधानसभा उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के संयोजक गोपाल आर्य और सह-संयोजक राकेश जैन मौजूद रहे। बिष्ट ने कहा कि जब बच्चे सार्वजनिक जिम्मेदारी और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हैं तो भविष्य के प्रति विश्वास मजबूत होता है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न दिए गए। साथ ही बाल संसद 2026 के विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।