पाराशर ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को तेज ध्वनि से बचाने के लिए खुले स्थानों और संकरी गलियों के लिए अलग-अलग डेसिबल लिमिट तय होनी चाहिए।