यहां जैन खाने को पाबंदियों के जाने-पहचाने नज़रिए से नहीं, बल्कि पॉसिबिलिटी के नज़रिए से देखा गया। आइये समझते हैं कि जैन कम्युनिटी में तीर्थंकर खाने का क्या मतलब है और यह कैसे बनता है।