सनातन संस्कृति में मां दुर्गा की आराधना के दो अनूठे और सुंदर रूप देखने को मिलते हैं। बंगाली समाज में जहां दुर्गा पूजा को कैलाश से मायके आई बेटी 'उमा' (गौरी) के आगमन और लाड़-प्यार के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, वहीं शेष भारत में उन्हें संपूर्ण ब्रह्मांड की रक्षक 'जगत जननी' और 'शक्ति' स्वरूप मानकर भक्ति और समर्पण से पूजा जाता है।