यदि आपके घर में छोटा बच्चा है और वह दूध पीते समय बहुत जल्दी थक जाता है या उसके माथे पर अत्यधिक पसीना आता है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. नवजात शिशुओं में इन दिनों दिल में छेद होने की समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है. इस बीमारी को कॉन्जेनिटल हार्ट डिफेक्ट यानी ह्रदय रोग कहा जाता है. यह एक ऐसी समस्या है जो बच्चे के जन्म से पहले ही उसके शरीर में पनपने लगती है. जब मां के गर्भ में शिशु का विकास हो रहा होता है, तब किसी वजह से उसके दिल की बनावट अधूरी रह जाती है, जिसके कारण दिल के अंदरूनी हिस्सों को बांटने वाली मांसपेशी की दीवार में सुराख रह जाता है. दिल के किस भाग में होता है छेद?मानव ह्रदय संरचना को समझें तो इसमें मुख्य रूप से चार हिस्से होते हैं, जिनमें दो ऊपरी हिस्से और दो निचले हिस्से शामिल हैं. इन सभी हिस्सों को आपस में अलग रखने और साफ-गंदे खून को मिलने से रोकने के लिए बीच में एक मजबूत मांसपेशी की दीवार होती है, जिसे डॉक्टर सेप्टम कहते हैं.जब दीवार में कोई सुराख या गैप रह जाता है, तो उसे दिल का छेद कहा जाता है. मेडिकल साइंस में इसे मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है. ऊपरी हिस्से की दीवार के छेद को एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट ASD कहते हैं और निचले हिस्से की दीवार के छेद को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट VSD कहा जाता है.बच्चों में सबसे आम है VSD की समस्याअस्पतालों में आने वाले मामलों पर गौर करें तो नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में सबसे ज्यादा वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट यानी दिल के निचले हिस्से का छेद पाया जाता है. कुल जन्मजात दिल की बीमारियों में लगभग 30 प्रतिशत मामले अकेले इसी डिफेक्ट के दर्ज होते हैं.इसके होने से दिल के बाएं हिस्से का साफ ऑक्सीजन युक्त खून दाहिने हिस्से के गंदे खून में मिलने लगता है. इस तकनीकी गड़बड़ी की वजह से दिल को फेफड़ों तक खून पहुंचाने के लिए जरूरत से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धीरे-धीरे बच्चे के दिल और फेफड़ों दोनों पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. यह भी पढ़ें: माइग्रेन और सामान्य सिरदर्द में क्या अंतर है? इन 6 संकेतों से करें पहचानबीमारी की पहचान कराने वाले मुख्य लक्षणशुरुआती दिनों में छोटे छेद का पता लगाना काफी मुश्किल होता है, लेकिन छेद का आकार बड़ा होने पर बच्चे के शरीर में इसके लक्षण साफ दिखाई देने लगते हैं. ऐसे बच्चे मां का दूध पीते समय बहुत जल्दी थक जाते हैं और हांफने लगते हैं. सबसे बड़ा लक्षण यह है कि दूध पीते समय उनके माथे और चेहरे पर बहुत ज्यादा पसीना आने लगता है.इसके अलावा बच्चा सामान्य से बहुत तेजी से सांस लेता है, उसे बार-बार फेफड़ों का इन्फेक्शन या निमोनिया होता है और उसका शारीरिक विकास व वजन अन्य बच्चों की तरह नहीं बढ़ पाता है. गंभीर मामलों में शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण बच्चे के नाखून, होंठ या त्वचा का रंग हल्का नीला भी पड़ने लगता है. यह भी पढ़ें: अपनी क्रश से कैसे कहें दिल की बात? ये आसान तरीके आएंगे काम