पीयूष गोयल बोले- कांग्रेस चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल-मंत्री बनाती थी:CEC रहते एमएस गिल को पद्म विभूषण देना क्या रिश्वत नहीं; राहुल से 10 सवाल किए

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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कांग्रेस पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और अपने पुराने रिकॉर्ड को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री जैसे पद दिए। उन्होंने राहुल गांधी से चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के सबूत देने की चुनौती भी दी। पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल को उनके कार्यकाल के दौरान पद्म विभूषण दिए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या पद पर रहते हुए देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान देना एक तरह का प्रलोभन या रिश्वत नहीं था। गोयल ने कांग्रेस के पुराने फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग के अधिकारियों को बाद में राजनीतिक पद दिए। उन्होंने राहुल गांधी के SIR और वोट चोरी से जुड़े आरोपों पर भी सवाल उठाए। पीयूष गोयल ने राहुल गांधी से पूछे 10 सवाल गोयल ने कहा कि राहुल गांधी लगातार वोट चोरी के आरोप लगाते हैं, लेकिन चुनाव आयोग के सामने हलफनामा दाखिल नहीं करते। उन्होंने राहुल को चुनौती दी कि वे अपने आरोपों के समर्थन में सबूत दें और शपथ लेकर अपना पक्ष रखें। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर बिहार में SIR की प्रक्रिया गलत थी, तो राहुल गांधी ने उस समय आवाज क्यों नहीं उठाई। गोयल के मुताबिक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान कांग्रेस ने नाम जोड़ने या हटाने के लिए कोई दावा दाखिल नहीं किया। कांग्रेस के पुराने फैसलों पर उठाए सवाल गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 1999 में उन्हें लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने का मौका दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस अधिकारी की पार्टी पहले ईमानदारी की तारीफ करती थी, उसे बाद में चुनाव लड़ने का टिकट देना क्या उसे पुरस्कृत करने जैसा नहीं था। एमएस गिल के मामले में गोयल ने कहा कि वे 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। वर्ष 2000 में, पद पर रहते हुए उन्हें पद्म विभूषण दिया गया था। गोयल ने इसे प्रलोभन बताते हुए सवाल किया कि क्या यह एक तरह की रिश्वत नहीं थी। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त आरके त्रिवेदी का भी उदाहरण दिया। गोयल के मुताबिक, 31 दिसंबर 1985 को उनका कार्यकाल समाप्त हुआ और 26 फरवरी 1986 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें गुजरात का राज्यपाल नियुक्त कर दिया। गोयल ने एमएस गिल के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने और टीकाराम मीणा को कांग्रेस की घोषणापत्र समिति में जगह दिए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू. केलकर की मई 2026 में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के सचिव के रूप में नियुक्ति पर भी सवाल उठाया। गोयल ने पूछा कि क्या चुनाव के बाद इस तरह की नियुक्तियां राजनीतिक लेन-देन का संकेत नहीं देतीं। नवीन चावला की नियुक्ति पर भी सवाल गोयल ने नवीन चावला की नियुक्ति का जिक्र करते हुए पूछा कि उस समय सोनिया गांधी किस हैसियत से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तय कर सकती थीं, क्योंकि उनके पास कोई सरकारी पद नहीं था। उन्होंने कहा कि उस समय नियुक्ति का अधिकार प्रधानमंत्री और सरकार के पास था। गोयल ने दावा किया कि कांग्रेस ने चुनाव अधिकारियों को राजनीतिक पद देकर पक्षपात को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने की स्वायत्तता दी है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी बोले पीयूष गोयल ने कहा कि पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार करती थी और किसी से सलाह नहीं ली जाती थी। उन्होंने दावा किया कि 2023 में NDA सरकार ने नया कानून बनाया, जिसके तहत चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया गया। अब प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष मिलकर चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े फैसले लेते हैं। गोयल ने केरल में SIR को लेकर कांग्रेस नेताओं के बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शशि थरूर और रमेश चेन्निथला ने कथित तौर पर केरल में कांग्रेस की जीत का श्रेय SIR को दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने SIR की तारीफ की और अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया था।