न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर आरोपित को दोषी पाया गया। मामले में शासन की ओर से पैरवी प्रतीक श्रीवास्तव और तुलसी मानकर ने की।