अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक कॉमेडियन को कचरे के डिब्बे में फेंकने का एक AI वीडियो शेयर किया है। इससे सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है। कॉमेडियन स्टीफन कोलबर्ट और ट्रम्प के बीच कई सालों से दुश्मनी चल रही है। कोलबर्ट अपने शो में लगातार ट्रम्प, उनकी नीतियों और MAGA आंदोलन का मजाक उड़ाते रहे हैं। वहीं ट्रम्प भी सोशल मीडिया पर बार-बार कोलबर्ट को निशाना बनाते रहे। कोलबर्ट ने शुक्रवार को करीब 11 साल बाद सीबीएस के ‘द लेट शो’ को अलविदा कहा। इसके खत्म होने के तुरंत बाद ट्रम्प ने AI जनरेटेड वीडियो शेयर किया। इसमें वे कॉमेडियन को घसीटकर कचरे के डिब्बे में फेंकते हैं और फिर अपने मशहूर डांस स्टेप्स करते नजर आते हैं। इस दौरान बैकग्राउंड में ‘YMCA’ गाना चलता है। ‘द लेट शो’ के बंद होने को लेकर CBS ने कहा कि इसे बंद करने का फैसला पूरी तरह आर्थिक कारणों से लिया गया है। लेकिन आलोचकों का आरोप है कि इसके पीछे राजनीतिक दबाव भी हो सकता है। कोलबर्ट ने भी सीधे ट्रम्प को शो बंद होने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है। लेकिन कई कॉमेडियन और उनके समर्थकों ने ऐसा संकेत जरूर दिया। फिनाले से एक दिन पहले मशहूर रॉक स्टार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने कोलबर्ट से कहा था, “तुम अमेरिका के पहले ऐसे इंसान हो जिसने सिर्फ इसलिए नौकरी गंवाई क्योंकि राष्ट्रपति मजाक बर्दाश्त नहीं कर पाए।” कोलबर्ट के जाने के साथ ही ‘द लेट शो’ फ्रेंचाइजी का एक लंबा दौर खत्म हो गया। इसकी शुरुआत 1993 में डेविड लेटरमैन ने की थी। अब इसे अमेरिका में लेट-नाइट टीवी के बदलते दौर की निशानी माना जा रहा है, जहां लोग पारंपरिक टीवी के बजाय सोशल मीडिया और ऑनलाइन क्लिप्स ज्यादा देख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ट्रम्प बोले- मुझे तानाशाह कहे जाने से दिक्कत नहीं, बेवकूफ कहना बुरा लगता है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें तानाशाह कहे जाने से दिक्कत नहीं है लेकिन अगर उन्हें उन्हें बेवकूफ कहता है तो उन्हें यह बात बहुत ज्यादा बुरी लगती है। शुक्रवार को न्यूयॉर्क में एक रैली में उन्होंने अपनी मानसिक क्षमता और याददाश्त की तारीफ की। ट्रम्प ने कहा, “उन्होंने मेरे ऊपर सबसे खराब हमला किया। उन्होंने कहा कि मैं बेवकूफ हूं। इसके बाद मैंने खुद ही कॉग्निटिव एबिलिटी टेस्ट (याददाश्त की जांच) कराने का फैसला किया।” ट्रम्प ने बताया कि टेस्ट की शुरुआत आसान सवालों से हुई, जैसे तस्वीरों या जानवरों की पहचान करना, और बाद में गणित के सवाल पूछे गए जिनमें गुणा, भाग और घटाव शामिल थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी सवालों के सही जवाब दिए। अमेरिका ने H-1B और ग्रीन कार्ड नियम सख्त किए, भारतीय प्रोफेशनल्स की बढ़ी चिंता अमेरिका ने H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर अमेरिका में काम कर रहे भारतीय IT इंजीनियरों, टेक कर्मचारियों और प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है। नई नीति के तहत अब अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पूरी करना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी USCIS ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सिर्फ बहुत खास परिस्थितियों में ही अमेरिका के अंदर से ग्रीन कार्ड आवेदन मंजूर करें। अब ज्यादातर लोगों को अपने देश लौटकर अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलेट के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस प्रक्रिया को कांसुलर प्रोसेसिंग कहा जाता है। अमेरिका में H-1B वीजा पाने वालों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। रिपोर्ट के मुताबिक, मंजूर किए गए कुल H-1B आवेदनों में करीब 71% भारतीय हैं। ऐसे में नए नियमों का सीधा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा। कई भारतीय पिछले 10 से 15 साल से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। अब अंतिम चरण में नियम बदलने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। कई लोग अमेरिका में घर खरीद चुके हैं और उनके बच्चों की पढ़ाई भी वहीं चल रही है। ऐसे में भारत लौटकर वीजा प्रक्रिया पूरी करने की शर्त उनके लिए नई चिंता लेकर आई है। H-1B अमेरिका का एक स्पेशल वर्क वीजा है, जिसके जरिए विदेशी प्रोफेशनल्स अमेरिका में नौकरी कर सकते हैं। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय IT और टेक सेक्टर के कर्मचारी करते हैं। बाद में इनमें से कई लोग ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं ताकि वे अमेरिका में स्थायी रूप से रह सकें। बांग्लादेश के दो पोर्ट अमेरिका इस्तेमाल करेगा, इनमें से एक अंडमान से सिर्फ 1100km दूर बांग्लादेश ने अमेरिका को दो महत्वपूर्ण बंदरगाहों के इस्तेमाल की इजाजत देने का फैसला किया है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सीक्रेट जानकारी शेयर करने को लेकर भी समझौता हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और बांग्लादेश के बीच कुल तीन बड़े समझौते हुए हैं। इन समझौतों के बाद बंगाल के खाड़ी रीजन में अमेरिका की मौजूदगी और प्रभाव काफी बढ़ सकता है। अमेरिका को बांग्लादेश के चिटगांव और मतारबाड़ी बंदरगाहों तक पहुंच मिलेगी। इन बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना और सैन्य जहाज कर सकेंगे। इससे अमेरिका को हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य और रणनीतिक ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी। चिटगांव बंदरगाह भारत के अंडमान-निकोबार क्षेत्र से सिर्फ 1100 किमी दूर है। पढ़ें पूरी खबर…