दिल्ली की खुली सोच और स्वतंत्र माहौल में पली-बढ़ी त्विषा शर्मा के लिए शादी के बाद भोपाल का ससुराल धीरे-धीरे एक ऐसे कैदखाने में बदल गया था, जहां उसकी जिंदगी पर उसका खुद का अधिकार खत्म होता जा रहा था।