गर्मियों में टेम्परेचर हाई होने से हवा रूखी हो जाती है। इससे सांस लेते समय नाक की म्यूकस लेयर इरिटेट होने लगती है। इसके कारण ब्लड वेसल्स फटने से कभी-कभार नाक से ब्लड आ सकता है। इसे हिंदी में नकसीर (नोज ब्लीड) और मेडिसिन की भाषा में ‘एपिस्टैक्सिस’ कहा जाता है। शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन से नाक की नाजुक ब्लड वेसल्स ड्राई होकर फट सकती हैं। इससे अचानक ब्लीडिंग शुरू हो सकती है। ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ के मुताबिक, दुनिया में लगभग 60% लोग जीवन में कभी-न-कभी नाक से खून आने की समस्या का सामना करते हैं। ज्यादातर मामलों में यह स्थिति मामूली होती है, लेकिन कुछ मामलों में ये किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज हम ‘नोज ब्लीड’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे- सवाल- नोज ब्लीड क्या है? जवाब- इसमें नाक के अंदर की नाजुक ब्लड वेसल्स फटने से खून आने लगता है। यह आमतौर पर दोनों नॉस्ट्रिल्स (नथुनों) में से किसी से भी हो सकता है। यह ज्यादातर मामलों में गंभीर नहीं होता है। सवाल- नोज ब्लीड क्यों होता है? जवाब- यह आमतौर पर ड्राई एयर से म्यूकस के इरिटेट होने और डिहाइड्रेशन के कारण होता है। इसके संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- अब इन कारणों को विस्तार से समझते हैं- तेज धूप, ड्राई और गर्म हवा डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) नाक में उंगली डालना एलर्जी या सर्दी-जुकाम चोट लगना नेजल स्प्रे का ज्यादा उपयोग ब्लड थिनर दवाएं हाई ब्लड प्रेशर स्मोकिंग और केमिकल्स ब्लड से जुड़ी बीमारियां सवाल- क्या नोज ब्लीड किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है? जवाब- हां, बार-बार या तेज नोज ब्लीड किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। जैसेकि- सवाल- किन लोगों को नोज ब्लीड का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- उम्र, हेल्थ कंडीशन और वातावरण के कारण कुछ लोगों को नोज ब्लीड का रिस्क ज्यादा होता है। जैसेकि- 2 से 10 साल के बच्चे ड्राई एयर, सर्दी-एलर्जी और नाक में उंगली या चीजें डालने की आदत के कारण रिस्क ज्यादा रहता है। 45 से 80 साल के वयस्क इस उम्र में ब्लड क्लॉटिंग में समय लगता है। साथ ही हाई बीपी, एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त होना) और ब्लीडिंग डिसऑर्डर का रिस्क बढ़ जाता है। गर्भवती महिलाएं प्रेग्नेंसी में नाक की ब्लड वेसल्स फैल जाती हैं, जिससे उन पर दबाव बढ़ता है और ब्लीडिंग की का रिस्क बढ़ जाता है। ब्लड थिनर दवाएं लेने वाले लोग एस्पिरिन या वॉरफारिन जैसी दवाओं से खून जल्दी नहीं जमता। इससे नोज ब्लीड का रिस्क बढ़ जाता है। ब्लड क्लॉटिंग डिसआर्डर से पीड़ित लोग हीमोफीलिया जैसी बीमारियों में बार-बार या हैवी ब्लीडिंग हो सकती है। एलर्जी या साइनस की समस्या वाले लोगों में भी यह रिस्क ज्यादा होता है। सवाल- क्या गर्मियों में नोज ब्लीड का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- हां, तेज गर्मी और सूखी हवा नाक की अंदरूनी लेयर को ड्राई कर देती है। सवाल- नाक से खून आने पर तुरंत क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, सही तरीके से तुरंत प्राथमिक इलाज करने से ब्लीडिंग कंट्रोल हो सकती है। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- नोज ब्लीड होने पर कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- ज्यादातर मामलों में नोज ब्लीडिंग सामान्य है। लेकिन कुछ स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या खानपान का भी नोज ब्लीड पर असर पड़ता है? जवाब- हां, इसका नोज ब्लीड पर सीधा असर पड़ता है। सही डाइट नाक की नॉस्ट्रिल्स को मजबूत रखती है, जबकि गलत खानपान से समस्या बढ़ सकती है। जैसेकि- लाइफस्टाइल और डाइट में क्या बदलाव करें? नोज ब्लीड से जुड़े कुछ जरूरी सवाल-जवाब सवाल- क्या नोज ब्लीड खतरनाक हो सकता है? जवाब- आमतौर पर नहीं, लेकिन बार-बार या ज्यादा खून आने पर यह किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। सवाल- क्या सिर पीछे करने से नोज ब्लीड रुकता है? जवाब- नहीं, इससे खून गले में जा सकता है। इसलिए हमेशा सिर थोड़ा आगे झुकाना चाहिए। सवाल- क्या AC में रहने से नोज ब्लीड का रिस्क कम होता है? जवाब- नहीं, AC की सूखी हवा नाक को ड्राई करके रिस्क बढ़ा सकती है। सवाल- नोज ब्लीड का इलाज कैसे होता है? जवाब- हल्के मामलों में नाक दबाकर और ठंडी पट्टी से कंट्रोल हो जाता है। जबकि गंभीर मामलों में डॉक्टर दवा देते हैं या अन्य इलाज करते हैं। …………………….. फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- हीट एडेमा क्या है: गर्मियों में बढ़ते केस, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, किसे ज्यादा रिस्क, बचाव के लिए जरूरी सावधानियां गर्मियों में कई बार हाथ-पैर में सूजन हो जाती है। ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, यह ‘हीट एडेमा’ का संकेत हो सकता है। पूरी खबर पढ़िए…