ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान की वैश्विक कूटनीति में भले ही अहमियत बढ़ गई है लेकिन अमेरिका ने ऐसी मांग रख दी है, जिसे पाकिस्तान के किसी भी नेता के लिए मानना आत्मघाती साबित हो सकता है.