चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ताओं की उस दलील को ख़ारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर दरअसल 'घुसपैठियों' को हटाने के नाम पर पीछे के दरवाज़े से नागरिकता जांच करने की कोशिश है.