वर्षों से विवादित और संवेदनशील रहे परिसर में व्यवस्था और सौहार्द्र का यह दृश्य विशेष महत्व रखता है, लेकिन इस शांति के बीच भोजशाला अब भी अपनी मां वाग्देवी की प्रतीक्षा में है।