मध्य प्रदेश की आधी से अधिक आबादी यानी 15 से 49 वर्ष की 54.7 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) और गैर-संक्रामक बीमारियों (एनसीडी) के गंभीर संकट से जूझ रही हैं।