मीटर टेंपरिंग और अंडरग्राउंड केबल जैसी तकनीकों से चोरी पकड़ना चुनौती बन गया है। शहर में हर साल औसतन 7,160 बिजली चोरी के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे बिजली कंपनी को करीब 26.80 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।