रिलेशनशिप एडवाइज- पति हैं गुस्से वाले:खुश रहें तो प्यार जताएं, लेकिन भरोसा नहीं मिजाज कब बिगड़ जाए, डर में रहती हूं, क्या करूं?

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सवाल- मेरी उम्र 33 साल है और मेरी शादी को 4 साल हो चुके हैं। मेरे पति बहुत गुस्से वाले हैं। जब वे गुस्से में नहीं होते, तो बहुत ख्याल रखते हैं, लेकिन गुस्सा आने पर उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। इस वजह से मेरा भी ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। मैं हमेशा डरी हुई रहती हूं कि न जाने उन्हें किस बात पर गुस्सा आ जाए। अब इस सिचुएशन से निपटना मेरे लिए मुश्किल हो रहा है। मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- अपनी समस्या शेयर करने के लिए शुक्रिया। आपकी स्थिति काफी गंभीर है और इसे समझना बहुत जरूरी है। साइकोलॉजी में इस कंडीशन को 'वॉकिंग ऑन एगशेल्स' कहते हैं। यानी आप हर वक्त इस डर में रहती हैं कि आपके किसी कदम से सामने वाला गुस्से से ‘फट’ न जाए। 4 साल का समय ये समझने के लिए पर्याप्त है कि यह केवल उनका 'स्वभाव' नहीं, बल्कि एक कंसर्निंग पैटर्न है। प्यार और गुस्से का यह 'भ्रम' खतरनाक अक्सर ऐसे रिश्तों में पार्टनर एक अजीब तरह के भ्रम में रहता है। आप कहती हैं कि "जब वे गुस्से में नहीं होते, तो बहुत ख्याल रखते हैं।" यही वह 'ट्रैप' है, जो आपको इस टॉक्सिक कंडीशन से बाहर नहीं निकलने देता। साइकोलॉजी के अनुसार, इसे 'इंटरमिटेंट रीइन्फोर्समेंट' कहते हैं। जब कोई व्यक्ति बुरा व्यवहार करता है और फिर अचानक बहुत सारा प्यार दिखाता है, तो सामने वाले को लगता है कि "वह दिल के बुरे नहीं हैं, बस गुस्सा आ जाता है।" याद रखें, उनका अच्छा व्यवहार उनके अग्रेसिवनेस को जायज नहीं ठहराता। प्यार के बदले में डर की कीमत चुकाना किसी भी स्वस्थ रिश्ते की निशानी नहीं है। डर के साये में पनपने वाला रिश्ता धीरे-धीरे अपनी पहचान और आत्मविश्वास को खत्म कर देता है। आपके शरीर को मिल रहे हैं 'वार्निंग सिग्नल' आपका बढ़ता ब्लड प्रेशर और लगातार रहने वाली एंग्जाइटी महज एक फिजिकल इश्यू नहीं है। इसे 'साइकोसोमैटिक इफेक्ट' कहते हैं। जब ब्रेन किसी तनाव को प्रोसेस नहीं कर पाता या आप अपनी भावनाओं को लंबे समय तक दबाकर रखते हैं, तो ये धीरे-धीरे किसी बीमारी का रूप ले लेता है। लगातार डर में रहने से शरीर में 'कोर्टिसोल' (स्ट्रेस हॉर्मोन) का लेवल बढ़ जाता है। ये इम्यूनिटी, हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर पर सीधा असर डालता है। आपका शरीर बार-बार चेतावनी दे रहा है कि यह माहौल आपके लिए सुरक्षित नहीं है। अगर आज इस पर ध्यान नहीं दिया, तो यह समस्या भविष्य में हार्ट डिजीज या क्रॉनिक डिप्रेशन का रूप ले सकती है। पति के गुस्से की वजह समझें हर बार गुस्सा सिर्फ स्वभाव से जुड़ा नहीं होता है। कई बार इसके पीछे तनाव, पुराने अनुभव, भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाई या खुद को समझा न पाने की परेशानी भी छिपी हो सकती है। ग्राफिक में पति के गुस्से की संभावित वजहें देखिए- आप किसी के गुस्से की 'मैनेजर' नहीं हैं अक्सर पत्नियां खुद को दोष देने लगती हैं या पति को शांत करने की जिम्मेदारी उठा लेती हैं। लेकिन यहां ये समझना जरूरी है कि आप किसी के गुस्से की ‘मैनेजर’ नहीं हैं। उन्हें शांत करना या उनके ट्रिगर को बचाना आपकी ड्यूटी नहीं है। गुस्सा कब एब्यूजिव हो सकता है, ग्राफिक में देखिए- इन परिस्थितियों में तार्किक सोच क्यों जरूरी है? जब हम किसी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं, तो हमारा 'लॉजिक' काम करना बंद कर देता है। आप उनके साथ बिताए अच्छे पलों को याद कर बुरे पलों को नजरअंदाज करती हैं। लेकिन आपको ठंडे दिमाग से कुछ सवालों के जवाब खुद को देने होंगे। स्थिति को सुधारने के लिए क्या करें? अगर लगता है कि इस रिश्ते में अभी भी गुंजाइश है और आपके पति बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं, तो एक एक्शन प्लान के साथ काम करना होगा। 1. हेल्दी बाउंड्री तय करें जब वे शांत हों, तब उनसे बात करें। उन्हें स्पष्ट शब्दों में कहें, "मुझे आपसे प्यार है, लेकिन आपका चिल्लाना और अपमान करना मुझे स्वीकार्य नहीं है। जब आप चिल्लाएंगे, मैं उस कमरे से बाहर चली जाऊंगी।" इसे 'सेट लिमिट्स' कहते हैं। 2. बातचीत के लिए सही समय चुनें गुस्से के दौरान दी गई कोई भी दलील ‘आग में घी’ का काम करती है। इसलिए पति से बातचीत के लिए ऐसा समय चुनें, जब वह खुश हों और उनका मूड अच्छा हो। इस दौरान समझदारी के साथ अपनी बात रखें। 3. प्रोफेशनल हेल्प लें अक्सर ‘घर की बातें घर में’ रखने के चक्कर में हम काउंसलर से सलाह नहीं लेते। लेकिन ऐसे समय में प्रोफेशनल हेल्प लेना जरूरी है। इसके लिए 'कपल थेरेपी' या 'एंगर मैनेजमेंट' की क्लासेज जॉइन कर सकते हैं। अगर वे ऐसा करने से मना करते हैं, तो यह संकेत है कि उन्हें आपकी परवाह नहीं है। 4. अपना सपोर्ट सिस्टम बनाएं अकेले इस बोझ को न उठाएं। अपने माता-पिता या किसी भरोसेमंद दोस्त को इस स्थिति के बारे में बताएं। जब लोग जानते हैं कि क्या हो रहा है, तो सामने वाले पर एक सामाजिक दबाव भी बनता है कि वह अपना व्यवहार सुधारे। गुस्से से कैसे निपटें? प्रोफेशनल हेल्प के दौरान भी आपको खुद ही इस गुस्से से निपटना होगा तो इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। इन्हें ग्राफिक में देखिए- रिश्ता बचाना सिर्फ एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं किसी भी रिश्ते को बचाने की जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति की नहीं होती। अगर पति बदलाव के लिए तैयार नहीं हैं, अपनी गलती नहीं मानते और आपका स्वास्थ्य लगातार खराब हो रहा है, तो आप समझदारी से फैसला ले सकती हैं। अंतिम सलाह आपकी सुरक्षा और आत्म-सम्मान सबसे ऊपर है। पति के अच्छे व्यवहार के दिनों को ढाल बनाकर उनके बुरे व्यवहार को नजरअंदाज न करें। अगर वे बदलाव के लिए तैयार नहीं हैं और आपकी सेहत बिगड़ती जा रही है, तो आपको अपने भविष्य और सुरक्षा के लिए समझदारी से सही फैसला लेना चाहिए। ………………ये खबर भी पढ़िएरिलेशनशिप एडवाइज- सहेली के 'एक्स' से हुआ प्यार: पर प्यार के साथ गिल्ट भी है और डर भी, क्या मैं दोस्त को धोखा दे रही हूं? आपने जो सिचुएशन बताई है, उसमें आपकी कोई गलती नहीं है। यह समस्या समाज की और लोगों की संकुचित सोच की है। चलिए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और उसके सॉल्यूशन पर बात करते हैं। आगे पढ़िए…