भारत में कस्टोडियल मौतों के मामलों में दोषसिद्धि दर बेहद कम है। अधिकांश मामलों में जांच, मुआवजा और निलंबन होते हैं, लेकिन पुलिसकर्मियों को सजा दिलाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।