‘श्री महाकाल महालोक’ के लोकार्पण के बाद उज्जैन में केवल श्रद्धालुओं की संख्या नहीं बढ़ी, बल्कि विकास की एक ऐसी धारा प्रवाहित हुई है जिसने पूरे शहर का भूगोल, अर्थव्यवस्था और भविष्य बदल दिया है।