वर्ल्ड अपडेट्स:भारत बोला- नेपाल से सीमा विवाद में तीसरे पक्ष का रोल बर्दाश्त नहीं; नेपाल ने कहा था- ब्रिटेन दखल दे

Wait 5 sec.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत-नेपाल सीमा से जुड़े नेपाली पीएम बालेन शाह के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच करीब 98% सीमा का निर्धारण पहले ही किया जा चुका है, लेकिन कुछ हिस्सों पर अभी भी सहमति बननी बाकी है। उन्होंने बताया कि गंडक नदी का रास्ता बदलने की वजह से कुछ इलाकों में सीमा से जुड़े सवाल पैदा हुए हैं। इसके अलावा, कुछ जगहों पर सीमा पार कब्जे और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण के मामले भी हैं, जिनकी दोनों देश मिलकर मैपिंग कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीमा से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा और समाधान के लिए भारत और नेपाल के बीच पहले से द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं। भारत-नेपाल सीमा का मामला दोनों देशों के बीच का विषय है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। दरअसल नेपाली पीएम बालेन शाह ने हाल ही में नेपाल की संसद में कहा था कि सीमा विवाद से जुड़े मुद्दे बातचीत से सुलझाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि इस मामले में ब्रिटेन की भूमिका हो सकती है क्योंकि 1816 की सुगौली की संधि ब्रिटिश भारत और नेपाल के बीच हुई थी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… अमेरिका में 30 भारतीय ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार, गैरकानूनी रूप से रह रहे थे अमेरिका में 30 भारतीय ट्रक ड्राइवरों को गिरफ्तार किया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इन लोगों पर आरोप है कि वे अमेरिका में गैरकानूनी तरीके से रह रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि इन्हें जल्द ही अमेरिका से बाहर भेजा जाएगा। अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ने बताया कि 11 से 15 मई के बीच ऑपरेशन चेकमेट के तहत एरिजोना में कुल 52 लोगों को पकड़ा गया। इनमें से 36 लोग ट्रक चला रहे थे। इनमें से 30 भारतीय है। बाकी 6 लोग मेक्सिको, एल साल्वाडोर और रूस के थे। इन ट्रक ड्राइवरों के पास कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन और वर्जीनिया जैसे राज्यों से जारी कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस थे, जबकि कुछ लोगों के पास कोई लाइसेंस ही नहीं था। अधिकारियों के मुताबिक ज्यादातर लोगों के पास काम करने की अनुमति से जुड़े दस्तावेज थे, जो बाइडन प्रशासन के दौरान मिले थे। लेकिन अब वे दस्तावेज मान्य नहीं हैं। रूस का यूक्रेन पर फिर बड़ा हमला: 18 की मौत, 90 से ज्यादा घायल रूस ने मंगलवार रात यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार कर दी। राजधानी कीव और द्नीप्रो समेत कई शहरों में हुए हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई, जबकि 90 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कई रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और दर्जनों लोग मलबे में फंस गए। यूक्रेन की आपातकालीन सेवा के अनुसार, कीव में 4 लोगों की मौत हुई है और 58 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 3 बच्चे भी शामिल हैं। शहर के 8 जिलों में रिहायशी भवनों और अन्य नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है। दूसरी ओर, द्नीप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र के द्नीप्रो शहर में रूसी हमलों में 6 लोगों की जान चली गई और 36 लोग घायल हुए। राहत कार्य के दौरान हुए दूसरे हमले में एक बचावकर्मी की भी मौत हो गई। द्नीप्रो में एक दो मंजिला मकान और चार मंजिला अपार्टमेंट का हिस्सा ढह गया। कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। कीव के पोदिल्स्की जिले में 9 मंजिला इमारत की ऊपरी मंजिलों को नुकसान पहुंचा, जबकि सोलोमियांस्की जिले में 20 और 24 मंजिला इमारतें प्रभावित हुईं। राहतकर्मी रातभर बचाव अभियान में जुटे रहे। हमलों के दौरान एयर रेड अलर्ट जारी रहा और कई इलाकों में लोग शेल्टर में शरण लेते रहे। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पहले ही रूस के संभावित बड़े हमले की चेतावनी दी थी। उन्होंने नागरिकों से सतर्क रहने और एयर रेड अलर्ट का पालन करने की अपील की थी। यूक्रेन ने एक बार फिर अपने पश्चिमी सहयोगियों से अतिरिक्त एयर डिफेंस मिसाइलों की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन हमलों को रोकने में सफलता मिल रही है, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलें अब भी देश की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। फरवरी 2022 से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यह हमला हाल के सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है। अमेरिका में घरेलू विवाद के बाद परिवार के 6 लोगों की गोली मारकर हत्या, आरोपी ने भी की आत्महत्या अमेरिका के आयोवा राज्य के मस्कटीन शहर में घरेलू विवाद के बाद एक व्यक्ति ने परिवार के 6 सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने खुद भी आत्महत्या कर ली। घटना में कुल 7 लोगों की मौत हुई है। पुलिस को सोमवार दोपहर एक घर में गोलीबारी की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर अधिकारियों ने घर के अंदर 4 लोगों के शव बरामद किए। सभी की मौत गोली लगने से हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने 52 वर्षीय रयान विलिस मैकफारलैंड को मुख्य संदिग्ध के रूप में चिन्हित किया। वारदात के बाद वह फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और कुछ समय बाद उसे ढूंढ़ लिया। मस्कटीन पुलिस प्रमुख एंथनी कीस के मुताबिक, पुलिस उससे बातचीत कर रही थी तभी उसने खुद को गोली मार ली। इसके बाद जांच में सामने आया कि मामले में दो और लोग भी मारे गए हैं। पुलिस ने एक अन्य मकान और एक स्थानीय व्यवसायिक प्रतिष्ठान से दो पुरुषों के शव बरामद किए। दोनों की मौत भी गोली लगने से हुई थी। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच के अनुसार पूरा घटनाक्रम घरेलू विवाद से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि सभी पीड़ित आरोपी के रिश्तेदार थे। मृतकों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। करीब 23 हजार आबादी वाले मस्कटीन शहर में इस घटना के बाद शोक का माहौल है। रूस को आर्मेनिया की दो टूक: EU पर अभी जनमत संग्रह नहीं; पश्चिम की ओर बढ़ते कदमों से बढ़ा तनाव आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने रूस की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने को लेकर जल्द जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी। रूस और आर्मेनिया के बीच बढ़ते तनाव के बीच पशिनयान ने कहा कि फिलहाल ऐसा जनमत संग्रह न तो व्यावहारिक है और न ही उचित। कजाकिस्तान में 29 मई को हुए यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) शिखर सम्मेलन में रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान ने आर्मेनिया से EU सदस्यता पर जल्द जनमत संग्रह कराने का आग्रह किया था। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि कोई भी देश एक साथ EAEU और EU दोनों का सदस्य नहीं रह सकता। पुतिन ने आर्मेनिया को पश्चिमी देशों के करीब जाने के खतरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि यूक्रेन संकट की शुरुआत भी EU के साथ बढ़ते रिश्तों से हुई थी। सोमवार को दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत भी हुई। पशिनयान ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि आर्मेनिया तब तक EAEU में बना रहेगा, जब तक किसी एक गुट को चुनना अनिवार्य नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि EU उम्मीदवार देश का दर्जा पाने के लिए औपचारिक आवेदन से पहले जनमत संग्रह कराने का कोई औचित्य नहीं है। आर्मेनिया में 7 जून को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले रूस ने आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। मॉस्को ने अपने राजदूत को वापस बुला लिया है और आर्मेनिया से मछली व समुद्री खाद्य पदार्थों के आयात पर रोक लगा दी है। इससे पहले भी कई आर्मेनियाई उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। यूरोपीय संघ ने आरोप लगाया है कि रूस आर्थिक दबाव के जरिए आर्मेनिया के चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया की 368 अरब डॉलर की ऑकस सबमरीन डील पर स्वतंत्र जांच: पूर्व मंत्री पीटर गैरेट करेंगे अगुआई ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पर्यावरण मंत्री और प्रसिद्ध रॉक बैंड मिडनाइट ऑयल के फ्रंटमैन पीटर गैरेट ने ऑकस पनडुब्बी समझौते की स्वतंत्र जांच शुरू करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि 368 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की इस रक्षा परियोजना पर जनता और संसद को पर्याप्त रूप से अपनी राय रखने का अवसर नहीं मिला। गैरेट पांच सदस्यीय स्वतंत्र आयोग की अगुआई करेंगे। आयोग में ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल के पूर्व प्रमुख एडमिरल क्रिस बैरी, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की पूर्व प्रीमियर कार्मेन लॉरेंस और सामाजिक कार्यकर्ता करेन लेस्टर समेत अन्य सदस्य शामिल हैं। आयोग सार्वजनिक सुनवाई करेगा और अक्टूबर में अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। ऑकस समझौता ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन के बीच सुरक्षा साझेदारी का हिस्सा है। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया अपने पुराने पनडुब्बी बेड़े को बदलने के लिए अमेरिका से परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियां खरीदेगा। इसकी अनुमानित लागत 368 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है। गैरेट ने कहा कि यह ऑस्ट्रेलिया के इतिहास का सबसे महंगा रक्षा सौदा है, लेकिन इस पर पर्याप्त सार्वजनिक बहस नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जनता और संसद से निर्णय प्रक्रिया का अधिकार छीन लिया गया है। जांच में यह परखा जाएगा कि क्या यह समझौता ऑस्ट्रेलिया की सुरक्षा को मजबूत करेगा, परमाणु कचरे का प्रबंधन कैसे होगा, क्या देश को वादा की गई पनडुब्बियां मिलेंगी और इस सौदे का चीन के साथ संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ की सरकार ने कहा है कि वह पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी का स्वागत करती है। सितंबर 2021 में घोषितऑकस समझौते को व्यापक रूप से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने की रणनीति के रूप में देखा जाता है। चीन ने शुरुआत से ही इस समझौते का विरोध किया है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने समझौते में संशोधन करते हुए अमेरिका से तीन पुरानी परमाणु पनडुब्बियां खरीदने का फैसला किया है। साथ ही 2027 से अमेरिका और ब्रिटेन को पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में सीमित संख्या में परमाणु पनडुब्बियां तैनात करने की अनुमति मिलेगी। अमेरिका में OpenAI पर मुकदमा; ChatGPT पर बच्चों को नुकसान पहुंचाने और अपराधों में मदद के आरोप अमेरिका का फ्लोरिडा राज्य ChatGPT की सुरक्षा और डिजाइन को लेकर OpenAI पर मुकदमा करने वाला पहला राज्य बन गया है। फ्लोरिडा के अटॉर्नी जनरल जेम्स उथमायर ने आरोप लगाया है कि ChatGPT बच्चों को लत लगा रहा है, हिंसक अपराधों में सहायता कर रहा है और कंपनी मुनाफे को सार्वजनिक सुरक्षा से ऊपर रख रही है। फ्लोरिडा द्वारा दायर सिविल मुकदमे में OpenAI और उसके CEO सैम ऑल्टमैन को प्रतिवादी बनाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने सुरक्षा जोखिमों की अनदेखी करते हुए AI तकनीक को तेजी से आगे बढ़ाया। मुकदमे में ऑल्टमैन को व्यक्तिगत रूप से भी जिम्मेदार ठहराने की मांग की गई है। मुकदमे में फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी गोलीकांड और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा के दो शोधार्थियों की हत्या का उल्लेख किया गया है। अभियोजकों के अनुसार, एक आरोपी ने कथित तौर पर मानव शवों के निपटान से जुड़े सवाल ChatGPT से पूछे थे। हालांकि, अभी तक यह न्यायिक रूप से साबित नहीं हुआ है कि ChatGPT ने इन अपराधों में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई। फ्लोरिडा सरकार का आरोप है कि ChatGPT बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। राज्य का कहना है कि कंपनी ने सार्वजनिक सुरक्षा की तुलना में व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दी। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए OpenAI ने कहा कि उसने नाबालिगों की सुरक्षा के लिए आयु-पहचान तकनीक समेत कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। कंपनी का कहना है कि वह AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। OpenAI पहले से ही कई मुकदमों का सामना कर रही है, जिनमें ChatGPT के संभावित मानसिक और सामाजिक प्रभावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इसी तरह Google, Meta, TikTok और अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी अपने उत्पादों के डिजाइन और उपयोगकर्ता सुरक्षा को लेकर कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला AI कंपनियों की जवाबदेही और नियमन को लेकर भविष्य की नीतियों पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।