रिपोर्ट-चुनाव से पहले ईरान पर हमला करना चाहते थे नेतन्याहू:मोसाद चीफ के साथ प्लान बनाया था; ट्रम्प को भनक लगी तो हमला रुका

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इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अक्टूबर में हुए चुनाव से ठीक पहले ईरान पर हमला करना चाहते थे। इजराइली न्यूज चैनल-12 ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया। रिपोर्ट के अनुसार नेतन्याहू ने इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के चीफ रोमन गोफमैन के साथ मिलकर योजना बनाई थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को इसकी भनक लग गई। इसके बाद उन्होंने दखल देकर हमले की योजना रुकवा दी। सेना और सुरक्षा अधिकारी नेतन्याहू के खिलाफ थे रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल की सेना और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े अधिकारी नेतन्याहू की योजना के खिलाफ थे। उन्हें डर था कि हमला किया तो ईरान जवाबी हमला कर सकता है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ जाता। आशंका थी कि 27 अक्टूबर को होने वाला चुनाव भी टल जाता। अधिकारियों की असहमति के बावजूद नेतन्याहू ने योजना पर काम जारी रहा। चैनल-12 के मुताबिक इजराइल के एक सुरक्षा अधिकारी ने जल्दबाजी में ऐसा कदम उठाया, जिससे अमेरिका को इस योजना के बारे में पता चल गया। अधिकारी ने क्या कदम उठाया था यह स्पष्ट नहीं किया गया है। पीएम नेतन्याहू के दफ्तर ने इस खबर को गलत बताया है। उसका कहना है कि प्रधानमंत्री ने उसी समय साफ कर दिया था कि इजराइली चुनाव से पहले ईरान पर हमला करने की कोई योजना नहीं थी। चुनाव से दो दिन पहले सेना प्रमुख से भी विवाद हुआ था ईरान पर कार्रवाई को लेकर नेतन्याहू और इजराइली सेना के प्रमुख एयाल जमीर के बीच तनाव की खबरें पहले भी सामने आई थीं। 25 अक्टूबर को चैनल-12 ने बताया था कि नेतन्याहू ने सेना को एक ऐसा आदेश दिया था, जिससे ईरान के साथ लड़ाई फिर शुरू हो सकती थी। सेना प्रमुख जमीर ने इस आदेश को मानने के इंकार कर दिया था। उन्होंने इस पर दोबारा चर्चा करने और प्रधानमंत्री से लिखित आदेश मांगा था। वह यह भी चाहते थे कि कार्रवाई को कानूनी मंजूरी मिलने के दस्तावेज दिए जाएं। रिपोर्ट के मुताबिक सेना के बड़े अधिकारियों को शक था कि नेतन्याहू ईरान के मुद्दे का इस्तेमाल चुनाव में फायदा उठाने के लिए करना चाहते हैं। उन्हें डर था कि चुनाव से पहले कोई कार्रवाई हुई तो हालात बिगड़ सकते हैं। नेतन्याहू ने उस समय इन खबरों को भी बकवास बताया था। उन्होंने कहा था कि सेना प्रमुख के साथ उनका कोई विवाद नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने सेना और मोसाद को ईरान की मौजूदा सरकार गिराने का निर्देश दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच जंग रोकने पर बातचीत चल रही है अमेरिका और ईरान के बीच कतर की मदद से बातचीत जारी है। दोनों देश जंग खत्म करने का रास्ता तलाश रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दोबारा हमले शुरू करने पर विचार करने की खबरें भी आई हैं। चैनल-12 के मुताबिक, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले नेतन्याहू ने ट्रम्प से कहा था कि मतदान खत्म होते ही ईरान पर फिर हमला किया जाए। लेकिन ट्रम्प फिलहाल ईरान से बातचीत को कुछ और समय देना चाहते हैं। नेतन्याहू को डर है कि बातचीत आगे बढ़ी तो ईरान पर लगे प्रतिबंध और दूसरे दबाव कम हो सकते हैं। शुक्रवार को ट्रम्प ने भी कहा कि अमेरिका ईरान से बात कर रहा है और उसके साथ बातचीत अच्छी चल रही है। ट्रम्प ने यह दावा भी किया कि अगर उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोका होता, तो आज इजराइल और पूरा मिडिल ईस्ट सुरक्षित नहीं होता। ईरान और इजराइल के बीच विवाद की 4 बड़ी वजह 1979 में दुश्मनी शुरू हुई: ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद नई सरकार ने इजराइल का विरोध शुरू कर दिया था। उसका कहना था कि इजराइल ने फिलिस्तीनियों की जमीन पर कब्जा कर रखा है। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते टूट गए। फिलिस्तीन का मुद्दा: ईरान फिलिस्तीनियों और हमास-हिजबुल्लाह जैसे इजराइल विरोधी संगठनों का समर्थन करता है। इजराइल इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। परमाणु हथियारों का डर: ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कामों के लिए है। लेकिन इजराइल को शक है कि वह परमाणु बम बना रहा है। इससे सुरक्षा का खतरा है। दोनों देश एकदूसरे पर हमला करते रहे हैं: कई साल तक दोनों देश छिपकर एक-दूसरे पर हमले करते रहे। 2024 और जून 2025 में दोनों के बीच सीधे मिसाइल और हवाई हमले भी हुए। इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला किया था 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया था। इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई बड़े सैन्य और सुरक्षा अधिकारी मारे गए थे। हमलों में ईरान के सैकड़ों मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य अड्डों और सेना के कमांड सेंटरों को निशाना बनाया गया। तेहरान समेत कई शहरों में इमारतों को नुकसान पहुंचा। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ----------------------- यह खबर भी पढ़ें… जिनपिंग चीन में ट्रम्प-पुतिन मुलाकात कराने से डर रहे: अपनी जमीन पर यूक्रेन बंटवारे का फैसला नहीं चाहते; 18-19 नवंबर की मीटिंग पर अभी सस्पेंस अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति पुतिन चीन में एक साथ बैठक करना चाहते हैं। पुतिन ने 19 अक्टूबर को इसका प्रस्ताव रखा। उसी दिन ट्रम्प ने बैठक में शामिल होने की रजामंदी भी दे दी। दोनों ने इस बातचीत में जिनपिंग को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। पूरी खबर पढ़ें…