सस्ती बिजली और आटे की डिमांड से उठे विरोध ने पाकिस्तान की गवर्नेंस सिस्टम पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। उधर, गिलगिट-बाल्टिस्तान में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक दर्जे और स्थानीय संसाधनों पर हक की मांग तेज हो रही है।