इस प्रतिमा से जुड़ी स्थानीय मान्यता बेहद रोचक है। कहा जाता है कि देवी अहिल्याबाई होलकर वर्ष 1778 में इसे इंदौर लाना चाहती थीं। इसके लिए प्रतिमा को बग्घी में रखा गया, लेकिन बग्घी आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद अहिल्याबाई ने प्रतिमा को कम्पेल में ही स्थापित करवा दिया।