कार्तिक महीने में सर्दी शुरू होने पर और फाल्गुन महीने में गर्मी शुरू होने पर बाबा महाकाल की आरती के समय में बदलाव किया जाता है। इसके साथ ही भगवान के नहाने के अनुष्ठान में भी बदलाव किया जाता है। रूप चौदस से भगवान महाकाल को गर्म पानी से नहलाने की परंपरा शुरू होती है।