एक समय था, जब देहरी पूजन करके लौट आते थे हिंदू, भोजशाला के संघर्ष की गाथा

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वर्ष में एक बार वसंत पंचमी पर सुबह से शाम तक विशेष पूजा की अनुमति भी दी गई। इसी आदेश के तहत मुस्लिम समाज को प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।