भोजशाला हिंदुओं को सौंपने की मांग को लेकर चला आंदोलन धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मालवा अंचल के सबसे संगठित जनआंदोलनों में शामिल हो गया।