सवाल- मेरी उम्र 37 साल है। मैं एक गवर्नमेंट स्कूल में टीचर हूं। मेरी प्रॉब्लम थोड़ी अजीब है। मुझे हर वक्त ये डर लगता रहता है कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। अपने कपड़ों, लुक, बातचीत को लेकर हमेशा एक डर और शर्मिंदगी महसूस होती है। मैं लोगों के बीच इसलिए बहुत बात भी नहीं कर पाती। मुझे डर लगता रहता है कि वे मुझे जज करेंगे या मुझे मूर्ख समझेंगे। स्कूल में स्टाफ रूम में भी मैं इस डर से हमेशा चुप ही रहती हूं। मेरा बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां थोड़ी भी गलती करने पर बहुत डांट पड़ती थी और उससे भी ज्यादा शर्मिंदा किया जाता था। शादी के बाद ससुराल में भी मुझे हर वक्त ये डर लगा रहता था कि लोग मुझे जज कर रहे हैं। हालांकि यहां मुझे कभी किसी ने शर्मिंदा नहीं किया, लेकिन ये जजमेंट का डर, शर्म का एहसास मेरे मन से जाता नहीं। मैं क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। हर इंसान चाहता है कि लोग उसे पसंद करें, लेकिन अगर यह चिंता हर वक्त मन में बनी रहे कि “लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे,” तो यह आत्मविश्वास और रिश्तों, दोनों को प्रभावित करने लगती है। बचपन की आलोचना मन में असुरक्षा पैदा कर सकती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि यह कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक सीखा हुआ डर है, जिसे सही समझ, छोटे-छोटे अभ्यास और सपोर्ट से बदला जा सकता है। आपके बचपन में ऐसा माहौल रहा, जहां गलती करने पर सिर्फ डांट ही नहीं पड़ती, बल्कि शर्मिंदा भी किया जाता था। ऐसे अनुभव धीरे-धीरे दिमाग में एक गहरा विश्वास बना देते हैं कि— “मैं अच्छी नहीं हूं” या “मुझसे गलती हुई तो लोग मुझे खराब समझेंगे।” यही वजह है कि अब बड़े होने के बाद भी, भले ही लोग आपको कुछ न कहें, लेकिन भीतर हमेशा ये एक डर बना रहता है कि लोग मुझे जज करेंगे। यह समस्या कैसे पैदा होती है? यह समस्या कैसे बनती और बनी रहती है, इसे समझने के लिए नीचे के पॉइंट्स देखें: 1. चाइल्डहुड 2. थिंकिंग पैटर्न 3. बिहेवियर 4. इमोशंस 5. समस्या का चक्र यह समस्या एक चक्र की तरह चलती है– आपकी मुख्य समस्या क्या है? लोगों के सामने जज किए जाने या गलत दिखने का डर। खुद को कम समझना या खुद पर भरोसा कम होना। अंदर से यह महसूस करना कि “मुझमें ही कुछ कमी है।” आसान शब्दों में पूरी बात आप खुद को कितना पसंद करते हैं? करें सेल्फ एस्टीम एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 10 सवाल हैं। आपको इन सवालों को 0 से 4 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब 'पूर्ण असहमति' है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब 'पूर्ण सहमति' है तो 4 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें। जिन सवालों के आगे R लिखा है, उनकी रिवर्स स्कोरिंग करें। सेल्फ इस्टीम कैसे बढ़ाएं चार हफ्तों का सेल्फ हेल्प प्लान सप्ताह 1 खुद को समझना और ध्यान से देखना लक्ष्य: अपने अंदर चलने वाली आलोचनात्मक आवाज को पहचानना और यह समझना कि शर्म/डर कहां से आ रहा है। एक्सरसाइज: सेल्फ–टॉक डायरी सीख: धीरे-धीरे समझ में आएगा कि अंदर की “जज करने वाली आवाज” अक्सर माता-पिता या टीचर्स जैसी लगती है। प्रैक्टिस: रोज 10 मिनट धीरे-धीरे सांस लें या मेडिटेशन करें। खुद से कहें: “यह भावना मेरे अतीत की है, वर्तमान की नहीं।”सप्ताह 2 सोच बदलना और खुद का ख्याल रखना लक्ष्य: आलोचना की जगह एक सपोर्ट वाली आवाज बनाना। एक्सरसाइज 1: मिरर टॉक एक्सरसाइज 2: डर की सच्चाई जांचें जब मन में ये डर आए कि “लोग मुझे जज करेंगे” तो खुद से पूछें: सप्ताह 3 खुद पर भरोसा बनाना लक्ष्य: दूसरों की राय की बजाय अपनी सोच पर भरोसा करना। एक्सरसाइज 1: डेली सक्सेस लॉग एक्सरसाइज 2: ‘आय डिसाइड’ (मेरा फैसला) सप्ताह 4 काम करके आत्मविश्वास बढ़ाना लक्ष्य: छोटे-छोटे काम करके खुद को साबित करना कि आप सक्षम हैं। याद रखें: कॉन्फिडेंस सोचने से नहीं, करने से आता है। स्टेप 1: धीरे-धीरे बोलना सीखें इस हफ्ते एक बार ‘ना’ कहें। कॉम्प्लिमेंट स्वीकार करें। स्टेप 2 आत्मविश्वास की प्रैक्टिस हर दिन अपने लिए एक छोटा सा काम चुनें, जैसेकि– हर काम के बाद लिखें: स्टेप 3 अच्छी चीजों का रिकॉर्ड हर दिन 3 अच्छी चीजें लिखें: स्टेप 4 अपने भीतर के बच्चे को चिट्ठी लिखें अपने बचपन वाले सेल्फ को एक प्यार भरी चिट्ठी लिखें: इससे आत्मसम्मान बढ़ता है और खुद से जुड़ाव होता है। स्टेप 5 खुद से सकारात्मक बातें खुद से रोज ये सकारात्मक वाक्य कहें- प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी? वैसे तो सेल्फ हेल्प से सुधार मुमकिन है, लेकिन अगर नीचे ग्राफिक में दी गई सिचुएशंस पैदा हों तो प्रोफेशनल हेल्प जरूरत लें। अंतिम बात कई बार बचपन की आलोचना मन में डर बसा देती है कि इंसान खुद को दूसरों की नजरों से देखने लगता है। लेकिन याद रखें, आपकी पहचान लोगों की राय से तय नहीं होती। आत्मविश्वास कोई जन्मजात गुण नहीं, बल्कि धीरे-धीरे सीखी जाने वाली ताकत है। आप इसे हासिल कर सकती हैं। ………………ये खबर भी पढ़िएमेंटल हेल्थ– मैं हर वक्त ओवरथिंकिंग करता हूं:चाहकर भी ब्रेन को कंट्रोल नहीं कर पाता, परेशान रहता हूं, इससे बाहर कैसे निकलूं ओवरथिंकिंग एक ऐसा मेंटल प्रोसेस है, जिसमें व्यक्ति छोटी-छोटी घटनाओं के बारे में भी जरूरत से ज्यादा सोचता है और उसे बहुत बड़ा बना देता है। यह आदत धीरे-धीरे एंग्जाइटी और इनसिक्योरिटी को बढ़ाती है। इससे सेल्फ डाउट पैदा होता है। व्यक्ति फैक्ट और उस फैक्ट के अपने इंटरप्रिटेशन में फर्क नहीं कर पाता। आगे पढ़िए…