EOW के मुताबिक वर्ष 1995-98 में लिया गया 1.86 करोड़ रुपये का फर्जी गृह निर्माण ऋण, 31 दिसंबर 2025 तक मूलधन और ब्याज मिलाकर 104 करोड़ रुपये के डूबत ऋण में बदल गया।