नीट (NEET) पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच शिक्षाविद और इनोवेटर सोनम वांगचुक का आमरण अनशन 20वें दिन भी जारी है. इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने दावा किया कि सरकार की ओर से अब तक कोई संवाद या बातचीत की पहल नहीं की गई है. उन्होंने इसे सरकार का "असंवेदनशील रवैया" बताया.द क्विंट से बातचीत में दीपके ने कहा कि वांगचुक पिछले 20 दिनों से अनशन पर हैं, लेकिन सरकार का कोई प्रतिनिधि उनकी तबीयत पूछने तक नहीं आया."सरकार की तरफ से कोई हाल तक पूछने के लिए नहीं आया. इतना बड़ा एजुकेशनिस्ट और साइंटिस्ट 20 दिनों से अनशन पर बैठा है, लेकिन सरकार बातचीत तक नहीं कर रही."'पहले सरकार बातचीत तो करे'जब उनसे पूछा गया कि अगर सरकार बातचीत के लिए बुलाती है तो उनकी गैर-समझौतावादी (Non-negotiable) मांगें क्या होंगी, दीपके ने कहा कि फिलहाल सरकार बातचीत के लिए आगे ही नहीं आ रही है.उनका कहना था कि सरकार पहले संवाद शुरू करे, उसके बाद मांगों पर चर्चा हो सकती है.'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही तय करेगा'आंदोलन की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है. इस पर उठ रहे सवालों के जवाब में दीपके ने कहा कि यह सिर्फ व्यक्ति बदलने का सवाल नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का मुद्दा है.उन्होंने कहा कि यदि किसी मंत्री को यह एहसास हो कि परीक्षा घोटालों और छात्रों की आत्महत्या जैसी घटनाओं की राजनीतिक जिम्मेदारी तय होगी, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की गंभीर कोशिश होगी.राजनीतिक महत्वाकांक्षा के सवाल पर क्या बोले?आंदोलन को लेकर लगातार उठ रहे इस सवाल पर कि क्या CJP आगे चलकर राजनीतिक पार्टी बनेगी या चुनाव लड़ेगी, दीपके ने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है.उन्होंने कहा,"आज की तारीख में हमारा ऐसा कोई इंटेंशन नहीं है. लेकिन अगर कोई राजनीतिक पार्टी बनाता है या चुनाव लड़ता है तो उसे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए."दीपके ने बताया कि वह कुछ महीने पहले तक अमेरिका में अपने करियर पर ध्यान दे रहे थे और सक्रिय राजनीति में आने की उनकी कोई योजना नहीं थी.क्या सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री बनें?16 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर पर बने मंच से आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि सरकार सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाए. इसी बात को लेकर द क्विंट ने अभिजीत दिपके से पूछा कि यदि सरकार धर्मेंद्र प्रधान की जगह सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बना दे तो क्या आंदोलन समाप्त हो जाएगा, इस पर दीपके ने कहा कि उनके अनुसार वांगचुक शिक्षा मंत्री बनने के योग्य हैं क्योंकि उन्होंने जीवनभर शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है.हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह एक काल्पनिक स्थिति है और सरकार ऐसा करेगी, इसकी संभावना उन्हें नहीं दिखती.उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि आंदोलन की तत्काल मांगें पूरी भी हो जाएं, तब भी CJP विभिन्न जनसरोकारों के मुद्दों पर सक्रिय रहेगी.सिर्फ इस्तीफा नहीं, कई अन्य मांगें भीदीपके ने कहा कि आंदोलन की मांगें केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं हैं. उन्होंने बताया कि CJP ने कई संस्थागत सुधारों का प्रस्ताव रखा है, जिनमें प्रमुख हैं:देश में हुए सभी पेपर लीक पर सरकार श्वेत पत्र (White Paper) जारी करे.शिक्षा मंत्री को हर पेपर लीक के 14 दिनों के भीतर संसद में जवाब देना अनिवार्य किया जाए.परीक्षा प्रणाली में हुई चूक और सुधारात्मक कदमों की सार्वजनिक जानकारी दी जाए.राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को अधिक स्वायत्त और संस्थागत स्वरूप देने के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाए.विपक्ष के समर्थन पर क्या कहा?विपक्षी दलों से समर्थन मांगने के सवाल पर दीपके ने कहा कि युवाओं और शिक्षा जैसे मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और श्रमिक संगठनों को साथ आना चाहिए.उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी एक राजनीतिक दल का मंच बनना नहीं, बल्कि शिक्षा और युवाओं के मुद्दे पर व्यापक जनसमर्थन जुटाना है.प्रशांत किशोर VS बीजेपी: बांकीपुर का मुकाबला सिर्फ एक 'उपचुनाव' क्यों नहीं है?