अगरबत्ती जलाकर उसने कहा कि ‘धरती गर्म हो रही है, दफीना (गड़ा धन) बलि मांग रहा है।’ इसके बाद उसने दोनों साथियों को इशारा किया और करीम खान ने कुल्हाड़ी से विजय जैन की गर्दन काट दी। इस दौरान प्रहलाद और टीकम ने विजय को पकड़ रखा था।