कई बार दूसरे ग्रामीणों ने इस परिवहन का विरोध भी किया। कार्य समाप्त होने के बाद ठेकेदार गड्ढों को यूं ही छोड़कर चले गए। अब यही गड्ढे मौत की खाई बन रहे हैं।