स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ की वजह से ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर ईरान का दबदबा है. इसे देखते हुए खाड़ी देशों ने लंबे समय से वैकल्पिक इन्फ़्रास्ट्रक्चर विकसित करने में निवेश किया है.