वर्ष 2008 में शुरू हुई इस परियोजना को भू-गर्भीय चुनौतियों के कारण अत्याधुनिक तकनीक और विशेष इंजीनियरिंग उपायों से अंतिम चरण तक पहुंचाया जा रहा है।