ओडिशा के संत अच्युतानंद दास ने 500 साल पहले 'भविष्यमालिका' लिखी थी। इसमें कलयुग के अंत, कल्कि अवतार और केदारनाथ-बद्रीनाथ जैसे पवित्र धामों पर आने वाले प्राकृतिक संकटों का विस्तृत उल्लेख मिलता है।