पाकिस्तान पहली बार मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में आधिकारिक तौर पर हिस्सा लेने जा रहा है। 24 साल की अनीका जमाल इकबाल को मिस वर्ल्ड पाकिस्तान 2026 का ताज पहनाया गया है। वह मिस वर्ल्ड के 73 साल के इतिहास में पाकिस्तान का पहला आधिकारिक प्रतिनिधित्व करेंगी। अनीका फिलहाल अकाउंटिंग और ऑडिटिंग में मास्टर्स कर रही हैं। वह इससे पहले मिस अर्थ, मिस ग्लोबल, मिस कॉस्मो, मिस इको इंटरनेशनल और मिस ऑरा इंटरनेशनल जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी पेजेंट में पाकिस्तान को रिप्रेजेंट कर चुकी हैं। मिस पाकिस्तान वर्ल्ड संगठन की अध्यक्ष सोनिया अहमद ने इसे पाकिस्तान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। 2002 में बना यह संगठन पिछले दो दशक से अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी प्रतियोगिताओं के लिए पाकिस्तानी प्रतिभागियों को तैयार कर रहा है। हालांकि मिस वर्ल्ड में यह पाकिस्तान की पहली आधिकारिक एंट्री होगी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… चीन के चोंगकिंग में भूस्खलन से कई मकान ढहे; कई लोगों के मलबे में दबने की आशंका दक्षिण-पश्चिम चीन के चोंगकिंग शहर के पेंगशुई काउंटी में शुक्रवार सुबह हुए भूस्खलन से कई रिहायशी मकान ढह गए। हादसा उस समय हुआ, जब प्रशासन पहाड़ी से पत्थर गिरने की चेतावनी के बाद 60 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का अभियान चला रहा था। इसी दौरान सुबह 9:08 बजे बड़ा भूस्खलन हुआ और कई लोग मलबे में दब गए। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, अब तक 9 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। हालांकि, मलबे में फंसे लोगों की संख्या का सत्यापन अभी जारी है। सरकारी प्रसारक CCTV के मुताबिक, सुबह करीब 8 बजे एक सामुदायिक कर्मचारी ने पहाड़ी से पत्थर गिरते देख प्रशासन को सूचना दी थी। चेतावनी जारी होने के बाद निकासी अभियान शुरू किया गया, लेकिन उसके करीब एक घंटे बाद ही भूस्खलन हो गया। जापान के पूर्व मंत्री बोले- भारत के रवैये से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट लेट हुआ; वादे नहीं निभाए, बार-बार फैसला बदला भारत-जापान के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर जापान के पूर्व मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारतीय पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। X पर की गई पोस्ट में उन्होंने लिखा कि प्रोजेक्ट के लेट होने की सबसे बड़ी वजह भारत का रवैया रहा। माकिहारा ने कहा कि वे खुद इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं। उनके मुताबिक, भारतीय पक्ष ने कई बार किए वादे पूरे नहीं किए। समझौते किए, फिर उनसे पीछे हट गया। आखिरी समय तक अपने हिसाब से शर्तें बदलता रहा। उन्होंने यह भी लिखा कि इसी वजह से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। माकिहारा के मुताबिक, जापानी टीम ने पूरी मेहनत से काम किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। पूर्व मंत्री ने अपनी पोस्ट में टॉयो केइजाई ऑनलाइन की एक रिपोर्ट भी शेयर की। इसमें दावा किया गया है कि बुलेट ट्रेन के सबसे अहम सेफ्टी सिस्टम (सिग्नलिंग सिस्टम) में जापान को शामिल नहीं किया गया। हालांकि, ये आरोप हिदेकी माकिहारा की X पोस्ट और उनके साझा किए गए लेख पर आधारित हैं। भारत सरकार या मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पूरी खबर पढ़ें चीन ने ब्रेन-चिप तकनीक में मारी बाजी: पहली कॉमर्शियल चिप का सफल प्रत्यारोपण चीन ने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक में अहम उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार व्यावसायिक रूप से स्वीकृत ब्रेन चिप का सफल प्रत्यारोपण किया है। शंघाई में सोमवार को हुई सर्जरी में NEO नाम की चिप एक ऐसे मरीज के मस्तिष्क की सतह पर लगाई गई, जिसकी 10 वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में स्पाइनल कॉर्ड को गंभीर चोट लगी थी और लंबे इलाज के बावजूद उसके हाथों की कार्यक्षमता पूरी तरह वापस नहीं आ सकी थी। सर्जरी के दौरान सिक्के के आकार की NEO चिप को मस्तिष्क की सतह पर स्थापित किया गया। यह चिप मस्तिष्क के संकेतों को पढ़कर कंप्यूटर तक भेजती है। कंप्यूटर इन संकेतों को कमांड में बदलकर रोबोटिक ग्लव संचालित करता है, जिससे मरीज हाथों की गतिविधियां करने में सक्षम हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन सफल रहा और मरीज की हालत स्थिर है। चिप ने स्थिर और उच्च गुणवत्ता वाले ब्रेन सिग्नल रिकॉर्ड किए हैं। NEO चिप को चीन की मेडिकल रेगुलेटरी अथॉरिटी ने मार्च में मंजूरी दी थी। इसके साथ ही यह क्लिनिकल ट्रायल से आगे बढ़कर अस्पतालों में व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध हो गई है। इस उपलब्धि के साथ चीन की स्टार्टअप Neuracle को ब्रेन-चिप के व्यावसायीकरण की दौड़ में इलॉन मस्क की न्यूरालिंक से आगे माना जा रहा है, क्योंकि न्यूरालिंक को अभी अमेरिका में पूर्ण व्यावसायिक मंजूरी नहीं मिली है। रूस का दावा- यूक्रेन के ड्रोन केंद्रों और ब्लैक सी बंदरगाहों पर किए सटीक हमले रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी सेना ने बुधवार रात यूक्रेन के ड्रोन निर्माण एवं भंडारण केंद्रों, ओडेसा और युज़नी बंदरगाहों की सैन्य अवसंरचना तथा ईंधन भंडार पर सटीक हमले किए। मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य यूक्रेन के सैन्य-औद्योगिक ढांचे और सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान पहुंचाना था। रूसी मंत्रालय के मुताबिक, कीव में उन परिसरों को निशाना बनाया गया जहां मध्यम और लंबी दूरी के ड्रोन तथा उनके पुर्जों का निर्माण और भंडारण किया जाता था। रूस ने कहा कि ओडेसा और युज़नी बंदरगाहों पर स्थित सैन्य कार्गो और ईंधन भंडारण सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा यूक्रेनी सेना के लिए उपयोग किए जाने वाले पांच ईंधन भंडारण टैंक नष्ट करने का भी दावा किया गया है। युगांडा में स्कूल बस हादसा, 20 बच्चों समेत 21 की मौत; एजुकेशनल टूर से लौट रहे थे छात्र पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा में एक स्कूल बस हादसे में 20 बच्चों समेत एक शख्स की मौत हो गई। AP के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार रात पूर्वी युगांडा के कपचोरवा जिले में हुआ। पुलिस के मुताबिक, सभी छात्र एजुकेशनल टूर के तहत सिपी फॉल्स घूमकर लौट रहे थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि चालक ने बस से नियंत्रण खो दिया। इसके बाद बस सड़क से उतरकर एक चट्टान से टकराई और पलट गई। हादसे में कई बच्चों समेत 3 लोग घायल भी हुए हैं। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने फिलहाल घायलों की सटीक संख्या नहीं बताई है। फ्रांस में असिस्टेड डाइंग बिल को संसद की मंजूरी: लाइलाज बीमारी से जूझ रहे वयस्कों को सख्त शर्तों पर मिलेगी अनुमति फ्रांस की नेशनल असेंबली ने असिस्टेड डाइंग (चिकित्सकीय सहायता से जीवन समाप्त करने) संबंधी विधेयक को 291-241 वोटों से अंतिम मंजूरी दे दी है। कानून लागू होने पर असाध्य और जानलेवा बीमारी से पीड़ित पात्र वयस्क मरीज डॉक्टर की निगरानी में सख्त शर्तों के तहत घातक दवा लेकर अपना जीवन समाप्त कर सकेंगे। हालांकि, कानून लागू होने से पहले इसे संवैधानिक परिषद की मंजूरी मिलना जरूरी होगा। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उन्होंने 2022 में फ्रांसीसी जनता से किया गया वादा पूरा किया है। विधेयक के तहत केवल 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के फ्रांसीसी नागरिक या कानूनी निवासी, जो लाइलाज और जानलेवा बीमारी के अंतिम चरण में हों तथा असहनीय पीड़ा झेल रहे हों, आवेदन कर सकेंगे। मरीज का आवेदन पहले चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम जांचेगी। समीक्षा के लिए 15 दिन का समय होगा और कम से कम दो दिन की विचार-अवधि के बाद मरीज को दोबारा अपनी सहमति देनी होगी। मंजूरी मिलने पर वह घर या स्वास्थ्य केंद्र सहित अपनी पसंद की जगह पर दवा ले सकेगा। कानून में केवल मानसिक पीड़ा को पात्रता का आधार नहीं माना गया है। गंभीर मानसिक रोगों या अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से पीड़ित लोग इसके दायरे में नहीं आएंगे। पूरी प्रक्रिया का खर्च फ्रांस की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा प्रणाली वहन करेगी।