आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उपभोक्ता को ऐसी कार बेची जाती है, जो ई-20 ईंधन के अनुकूल नहीं है और उसके कारण वाहन में तकनीकी खराबी आती है, तो इसकी जिम्मेदारी वाहन निर्माता और अधिकृत डीलर दोनों की होगी।