मुंबई में लगातार बारिश और जलभराव के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने रैट फीवर (लेप्टोस्पायरोसिस) को लेकर हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। दूषित बाढ़ के पानी से फैलने वाली इस बीमारी से बचने के लिए लोगों को जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। रैट फीवर एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो इन्फेक्टेड जानवरों (खासकर चूहों) के पेशाब से पानी या मिट्टी के जरिए फैलता है। ‘जर्नल ऑफ इन्फेक्शन’ में साल 2015 में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल रैट फीवर के करीब 10 लाख मामले सामने आते हैं और लगभग 60 हजार लोगों की मौत होती है। भारत में भी बारिश के मौसम में रैट फीवर के मामले बढ़ जाते हैं। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज रैट फीवर की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- रैट फीवर क्या है? जवाब- रैट फीवर एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है। मेडिसिन की भाषा में इसे लेप्टोस्पायरोसिस कहते हैं। यह लेप्टोसिरा नाम के बैक्टीरिया से फैलता है। रैट फीवर इंसानों और कई जानवरों को संक्रमित कर सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं। जैसे- समय पर इलाज न मिले, तो इन्फेक्शन किडनी, लिवर और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। सवाल- रैट फीवर कैसे फैलता है? जवाब- रैट फीवर संक्रमित चूहों और दूसरे जानवरों के पेशाब से फैलता है। उनका पेशाब पानी, मिट्टी या कीचड़ को दूषित कर देता है। यह बैक्टीरिया स्किन के कट या घाव, आंख, नाक या मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है। बारिश और बाढ़ के दौरान इसका रिस्क सबसे ज्यादा होता है। सवाल- क्या रैट फीवर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है? जवाब- आमतौर पर नहीं। ऐसे मामले बहुत दुर्लभ होते हैं। इसलिए सामान्य संपर्क, साथ बैठने, हाथ मिलाने या एक साथ खाना खाने से इसका संक्रमण नहीं फैलता। सवाल- बारिश में रैट फीवर का खतरा क्यों बढ़ जाता है? जवाब- भारी बारिश और बाढ़ के दौरान लेप्टोसिरा बैक्टीरिया ज्यादा समय तक जिंदा रहता है। इस दौरान बाढ़ का पानी सीवर, मिट्टी और जानवरों के मल-मूत्र के साथ मिलकर दूषित हो जाता है। ऐसे पानी के संपर्क में आने से रैट फीवर का खतरा बढ़ जाता है। सवाल- किन लोगों को रैट फीवर का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों को बाकियों की तुलना में रैट फीवर का रिस्क ज्यादा रहता है। डिटेल ग्राफिक में देखिए- सवाल- रैट फीवर के शुरुआती और गंभीर लक्षण क्या हैं? जवाब- कुछ लोगों में रैट फीवर के कोई लक्षण नहीं दिखते। वहीं, कुछ लोगों में इसकी शुरुआत फ्लू जैसे लक्षणों से होती है। ग्राफिक में रैट फीवर के सभी शुरुआती लक्षण देखिए- गंभीर मामलों में 3-10 दिन बाद लक्षण बढ़ सकते हैं। कई बार मरीज को बीच में कुछ समय के लिए राहत भी महसूस होती है। इसके बाद कुछ लक्षण दिख सकते हैं। ग्राफिक में सभी गंभीर लक्षण देखिए- सवाल- रैट फीवर और सामान्य वायरल फीवर में क्या फर्क है? जवाब- शुरुआत में रैट फीवर और वायरल फीवर के लक्षण काफी मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए कई लोग इन्हें एक ही बीमारी समझ लेते हैं। हालांकि, दोनों के कारण, इलाज और गंभीरता में बड़ा अंतर होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- कब तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए? जवाब- अगर तेज बुखार के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें- सवाल- रैट फीवर की जांच कैसे होती है? जवाब- रैट फीवर की जांच मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और हाल में बाढ़, जलभराव या गंदे पानी के संपर्क में आने की जानकारी के आधार पर शुरू होती है। इन्फेक्शन की पुष्टि के लिए डॉक्टर कुछ लैब टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। जैसे- सवाल- रैट फीवर का इलाज कैसे किया जाता है? जवाब- इलाज इन्फेक्शन की गंभीरता पर निर्भर करता है, जैसेकि- सवाल- रैट फीवर से बचाव के लिए क्या करें? जवाब- बारिश और बाढ़ के मौसम में थोड़ी सावधानी बरतकर रैट फीवर के रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ग्राफिक में बचाव के सभी उपाय देखिए- सवाल- बारिश के मौसम में किन गलतियों से बचें? जवाब- बारिश के मौसम में कुछ गलतियां रैट फीवर का रिस्क बढ़ा सकती हैं, जैसेकि- रैट फीवर से जुड़े कुछ कॉमन सवाल–जवाब सवाल- क्या बारिश के पानी में चलने से रैट फीवर हो सकता है? जवाब- नहीं, सिर्फ बारिश के पानी में चलने से रैट फीवर नहीं होता। लेकिन अगर बारिश का पानी दूषित है और उसमें रैट फीवर पैदा करने वाले बैक्टीरिया मौजूद हैं, तो इन्फेक्शन का रिस्क हो सकता है। सवाल- कैसे पता चलेगा कि बारिश के पानी में बैक्टीरिया था या नहीं? जवाब- ये पता लगाने का कोई तरीका नहीं है। इसलिए अगर बारिश के पानी में चले या भीगे हैं तो घर आकर तुरंत अच्छे से साबुन से नहाएं। अगर शरीर में कहीं कट या घाव का निशान है, जो बारिश के पानी के संपर्क में आया है तो अपने शरीर के सभी संकेतों पर गौर करें। अगर उसके बाद बुखार आ जाए तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। सवाल- क्या यह बीमारी चूहे के काटने से भी हो सकती है? जवाब- नहीं, ज्यादातर मामलों में संक्रमण संक्रमित चूहों या दूसरे जानवरों के पेशाब में मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आने से होता है। सवाल- क्या एक बार होने के बाद रैट फीवर दोबारा भी हो सकता है? जवाब- हां, रैट फीवर एक बार होने के बाद भी दोबारा हो सकता है। इसलिए ठीक होने के बाद भी बचाव के लिए सावधानी बरतना जरूरी है। ………………….. फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- बारिश के मच्छर फैलाते डेंगू-मलेरिया: इन 10 लक्षणों को इग्नोर न करें, डॉक्टर से जानें बचाव के लिए 8 सावधानियां बारिश के मौसम में जगह-जगह जमा पानी और नमी के कारण मच्छर तेजी से पनपते हैं। इससे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी कई बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है। पूरी खबर पढ़िए…