पेट दर्द, मतली और उल्टी को लोग अक्सर गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार इसके पीछे ‘पैंक्रियाटाइटिस’ जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। यह पैंक्रियाज (अग्न्याशय) में होने वाली सूजन है। पैंक्रियाज भोजन को पचाने और ब्लड शुगर कंट्रोल रखने में अहम भूमिका निभाता है। जब इसमें सूजन आ जाती है, तो कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ (GBD) के मुताबिक, भारत में पैंक्रियाटाइटिस के मरीजों की संख्या 1990 में करीब 2.3 लाख थी, जो 2021 में बढ़कर 5.2 लाख हो गई। यानी 31 साल में मामलों में करीब 126% की बढ़ोतरी हुई है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में पैंक्रियाटाइटिस पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट– डॉ. अशोक कुमार, सीनियर कंसल्टेंट, HOD, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशलिटी, हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- पैंक्रियाज क्या है? इसका शरीर में क्या काम है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस क्या होता है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस कितने प्रकार का होता है? जवाब- पैंक्रियाटाइटिस मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है- 1. एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस 2. क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस सवाल- पैंक्रियाटाइटिस क्यों होता हैं? जवाब- इसकी सबसे कॉमन वजहें गॉलस्टोन (पित्ताशय की पथरी) और ज्यादा शराब पीना हैं। गॉलस्टोन पैंक्रियाटिक डक्ट को ब्लॉक कर सकती है। इससे पाचन एंजाइम बाहर नहीं निकल पाते और पैंक्रियाज में ही एक्टिव होकर उसे नुकसान पहुंचाने लगते हैं। ग्राफिक में पैंक्रियाटाइटिस के सभी कारण देखिए- सवाल- इसके लिए लोगों की लाइफस्टाइल और आदतें कितनी जिम्मेदार हैं? जवाब- कई मामलों में खराब लाइफस्टाइल इसका रिस्क बढ़ाती है, जैसेकि- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जवाब- इसका शुरुआती लक्षण पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द है। यह दर्द अचानक शुरू हो सकता है और कई बार पीठ तक फैल सकता है। ग्राफिक में सभी शुरूआती लक्षण देखिए- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस के गंभीर लक्षण क्या हैं? जवाब- पैंक्रियाज में लगातार सूजन बढ़ने पर कुछ ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जो मेडिकल इमरजेंसी होते हैं। ग्राफिक में पैंक्रियाटाइटिस के गंभीर लक्षण देखिए- सवाल- क्या पैंक्रियाटाइटिस एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है? जवाब- हां, अगर सूजन ज्यादा बढ़ जाए तो कई तरह के कॉम्पलिकेशंस हो सकते हैं- सवाल- किन लोगों को पैंक्रियाटाइटिस का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों में इसका रिस्क दूसरों की तुलना में ज्यादा होता है। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस का डाइग्नोसिस कैसे होता है? जवाब- डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर शारीरिक जांच करते हैं। पैंक्रियाटाइटिस की आशंका होने पर पुष्टि के लिए कुछ ब्लड और इमेजिंग टेस्ट कराते हैं। बीमारी की गंभीरता समझने के लिए अन्य जांचें भी करा सकते हैं, जैसेकि- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस का इलाज कैसे होता है? जवाब- यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी कितनी गंभीर है और इसकी वजह क्या है। सवाल- इस बीमारी में कौन-सी चीजें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए और क्या खा सकते हैं? जवाब- इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस का डायबिटीज से क्या संबंध है? जवाब- अगर सूजन लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार हो तो पैंक्रियाज की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इससे शरीर में ब्लड शुगर का संतुलन बिगड़ता है और डायबिटीज का रिस्क बढ़ता है। सवाल- पैंक्रियाटाइटिस से बचाव के लिए क्या करें? जवाब- कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर पैंक्रियाटाइटिस का रिस्क काफी हद तक कम कर सकते हैं, जैसेकि- पैंक्रियाटाइटिस से जुड़े कॉमन मिथ और फैक्ट मिथ 1- हर पेट दर्द पैंक्रियाटाइटिस हो सकता है। फैक्ट- पेट दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जैसे गैस, अपच, अल्सर या गॉलस्टोन। इसलिए सिर्फ पेट दर्द के आधार पर पैंक्रियाटाइटिस की पहचान नहीं की जा सकती। मिथ 2- सिर्फ शराब पीने वालों को ही पैंक्रियाटाइटिस होता है। फैक्ट - गॉलस्टोन, हाई ट्राइग्लिसराइड्स, कुछ दवाएं, संक्रमण और जेनेटिक फैक्टर्स भी पैंक्रियाटाइटिस का कारण बन सकते हैं। मिथ 3- दुबले-पतले लोगों को पैंक्रियाटाइटिस नहीं हो सकता। फैक्ट- यह बीमारी किसी भी उम्र और वजन के व्यक्ति को हो सकती है। मिथ 4- पैंक्रियाटाइटिस हमेशा अचानक और तेज दर्द के साथ ही होता है। फैक्ट- एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस में दर्द अचानक हो सकता है। लेकिन क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस में लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं और दर्द बार-बार या लंबे समय तक बना रह सकता है। मिथ 5- घरेलू नुस्खों से पैंक्रियाटाइटिस ठीक किया जा सकता है। फैक्ट- घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। ****************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ………………… फिजिकल हेल्थ- 14 करोड़ लोगों की किडनी खराब: सरकार की सिफारिश- साल में दो बार कराएं KFT, डॉक्टर से जानें हर जरूरी सवाल का जवाब पिछले दिनों स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) को लेकर एक सिफारिश की। इसमें 20 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को हर 6 महीने में KFT कराने की बात कही गई है। पूरी खबर पढ़ें..