कोरोना वायरस के खौफ से दुनिया अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि एक नई संक्रामक बीमारी के खतरे ने हड़कंप मचा दिया है. रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित एक बेहद सुरक्षित एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुए एक हादसे के बाद दुनिया भर के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संगठन अलर्ट मोड पर आ गए हैं.दरअसल, इस सीक्रेट लैब में काम करने वाली एक 28 वर्षीय महिला वैज्ञानिक की संदिग्ध संक्रमण के बाद मौत हो गई थी, जिसमें जीवित बैक्टीरिया मौजूद थे. इस हादसे के बाद रूस में हड़कंप मच गया है और ऐसे में लगभग 197 लोगों को आइसोलेशन यानी क्वारंटाइन में भेज दिया गया है.लैब में कैसे हुआ यह जानलेवा हादसा?यह पूरी घटना रूस के साइबेरियाई क्षेत्र के पास शेलेखोव में मौजूद इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की है. यहां कार्यरत 28 वर्षीय महिला वैज्ञानिक दार्या शिपिलोवा एक फिल्ड ट्रिप से लौटने के बाद लैब में सैंपल्स पर काम कर रही थीं. इसी दौरान अचानक उनके हाथ से जीवित प्लेग बैक्टीरिया से भरी एक टेस्ट ट्यूब टूट गई. इसके कुछ दिनों बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी. देखते-ही-देखते उनकी हालत बिगड़ने लगी और 2 अक्टूबर 2026 को उन्होंने दम तोड़ दिया. क्या यह कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक है?इस हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या संक्रमण कोरोना वायरस जितना या उससे भी अधिक खतरनाक हो सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, Yersinia Pestis इसका वैज्ञानिक नाम है, जिसे हिंदी में प्लेग कहा जाता है. इसका नाम Yersinia नाम के एक स्विस-फ्रांसीसी वैज्ञानिक अलेक्सांद्र यर्सिन के नाम पर है, जिसने 1894 में हांगकांग में इस बैक्टीरिया की पहचान की थी. Pestis एक लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ प्लेग या महामारी होता है. रूस की लैब से लीक हुए मामले में न्यूमोनिक प्लेग की आशंका जताई जा रही है, जो प्लेग का सबसे घातक और जानलेवा रूप माना जाता है.सामान्य प्लेग जहां पिस्सुओं या चुहों के काटने से फैलता है, वहीं न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों को सीधे प्रभावित करता है. यह कोरोना वायरस की तरह खांसने, छींकने और हवा में मौजूद ड्रॉपलेट्स के जरिए बेहद आसानी से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है. अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह फेफड़ों को पूरी तरह डैमेज कर देता है और संक्रमित व्यक्ति की 24 से 48 घंटे के भीतर मौत हो सकती है. 8 करोड़ मौतों की वजह बन चुका है प्लेगबता दें, प्लेग मानव इतिहास में करीब 9 करोड़ लोगों की मौत की वजह बन चुका है. कुछ रिपोर्ट्स में इन मौतों की संख्या को 20 करोड़ के आसपास माना गया है. भारत में इसने 128 साल पहले कोरोना से भी भयानक तबाही मचाई थी. इससे पहले भी यह कई मौतों की वजह बन चुका है. 541 ई. के आसपास जस्टिनियन प्लेग पूर्वी रोमन साम्राज्य में शुरू हुआ और भूमध्य सागर क्षेत्र में फैला. प्राचीन डीएनए अध्ययनों ने इसकी पुष्टि Yersinia pestis से की है. कई लहरों में लाखों लोगों की मौत हुई और साम्राज्य कमजोर हुआ.इसके बाद 1346–1353 और उसके बाद यह महामारी यूरोप, मध्य एशिया और मध्य पूर्व में फैली. यूरोप की आबादी का अनुमानित 30–60 प्रतिशत हिस्सा मरा, कुल मौतें कई करोड़ तक बताई जाती हैं. यह मुख्य रूप से प्लेग का बुबोनिक रूप था, लेकिन न्यूमोनिक रूप भी मौजूद था. इसके बाद भी सदियों तक यूरोप और अन्य जगहों पर छोटे-बड़े प्रकोप होते रहे. तीसरी बार 1855 में चीन के युन्नान क्षेत्र से शुरू होकर हांगकांग, भारत, अमेरिका और अन्य जगहों तक पहुंचा. भारत और चीन में लाखों मौतें हुईं. यह भी पढ़ें: इस गांव में आज भी चलता है राजा का राज, क्या नहीं माना जाता देश का कानून?रूस में इमरजेंसी बैठक, 5 अस्पताल हाई अलर्ट परमहिला वैज्ञानिक की मौत के बाद रूसी प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया है. इरकुत्स्क के गवर्नर इगोर कोबजेव ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल आपात बैठक बुलाई. सुरक्षा के लिहाज से क्षेत्र के 5 बड़े अस्पतालों को क्वारंटाइन और सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है. मृत शरीर के सीधे संपर्क में आए 197 सहयोगियों और कर्मचारियों को सख्त मेडिकल निगरानी में रखा गया है.हालांकि, राहत कि बात यह है कि अभी तक इनमें से किसी भी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण नहीं दिखे हैं और शुरुआती टेस्ट नेगेटिव आए हैं. प्रशासन ने किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए लैब के आसपास के इलाकों में मास्क पहनना अनिवार्य क दिया है. यह भी पढ़ें: कहां से हुई लोकतंत्र की शुरुआत? कहां बनी थी पहली पार्लियामेंट