‘कारगिल युद्ध में हीरो वही बना, जिसके सामने दुश्मन आ गया। मेरे सामने दुश्मन आया, तो मैंने टपका दिया। मेरे जैसे हजारों योद्धा भारतीय सेना में हैं, मैं अकेला नहीं हूं। फर्क सिर्फ इतना था कि मुझे मौका मिला और कारगिल युद्ध की पहली जीत का पहला तिरंगा फहराने का सौभाग्य इस हाथ को मिला।’