नर्मदा के किनारे बसा यह नगर केवल संस्कारधानी नहीं, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की उन निर्णायक करवटों का साक्षी भी है, जहां इतिहास ने अपनी दिशा बदली और उस इतिहास के केंद्र में है-त्रिपुरी। 1939 का त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का असाधारण अध्याय था।