आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले छत्तीसगढ़ के 1649 सेनानियों के परिवारों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।