प्रदेश में नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष के चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली यानी पार्षदों के माध्यम से कराया गया था। अधिनियम में संशोधन करके फिर प्रत्यक्ष प्रणाली यानी सीधे मतदाताओं से चुनाव की व्यवस्था लागू कर दी गई।