अंगदान के जरिए एक ब्रेन डेड व्यक्ति कई लोगों को नई जिंदगी दे सकता है। हालांकि ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को ऑर्गन रिजेक्शन और इन्फेक्शन से बचने के लिए आजीवन सावधानियां बरतनी पड़ती हैं।