बिलासपुर हाई कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़ित नाबालिगों के मामलों में अहम फैसला देते हुए कहा है कि अवांछित गर्भ को जबरन ढोने के लिए मजबूर करना गरिमा और प्रजनन स्वायत्तता के खिलाफ है। कोर्ट ने 26 सप्ताह और 14 सप्ताह के दो अलग-अलग मामलों में गर्भपात की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि गर्भ की अवधि ही एकमात्र आधार नहीं हो सकती।