दिल्ली के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान-2047 नोटिफाई होने के बाद अगले दो माह में राजधानी के बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़े कई नियमों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार लैंड पूलिंग पॉलिसी और मिक्स्ड लैंड यूज वाली सड़कों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जा रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, लैंड पूलिंग पॉलिसी को लागू करने में आ रही तकनीकी अड़चनों को दूर करने के लिए दिल्ली विकास अधिनियम में जरूरी संशोधन किए जाएंगे। कंसोर्टियम के गठन समेत अन्य प्रक्रियाओं में बदलाव अंतिम चरण में हैं और इन्हें करीब एक महीने में लागू किए जाने की तैयारी है। डीडीए के वाइस चेयरमैन को इस पूरी प्रक्रिया का नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। वे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और लैंड पूलिंग क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास की निगरानी करेंगे। 351 मिक्स्ड लैंड यूज सड़कों का समाधानएमपीडी-2047 के बाद दिल्ली की करीब 351 मिक्स्ड लैंड यूज सड़कों से जुड़े पुराने विवादों का समाधान होने की उम्मीद है। इन मामलों में लंबे समय से कानूनी पेच बना हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक, हाईकोर्ट के हालिया निर्णय के बाद प्रशासन को समाधान के लिए दो महीने का समय मिला है। पहले सीलिंग की कार्रवाई झेल चुके कई इलाके भी इसमें शामिल हैं। ऊंची इमारतों के निर्माण का रास्ता साफनए मास्टर प्लान में दिल्ली के सीमित भू-क्षेत्र को देखते हुए वर्टिकल ग्रोथ पर जोर दिया गया है। अधिकांश क्षेत्रों में ऊंचाई से जुड़ी पाबंदियों में राहत दी गई है। हालांकि लुटियंस जोन, एयरपोर्ट के आसपास और लो-डेंसिटी क्षेत्रों में प्रतिबंध लागू रहेंगे। अब भवन की ऊंचाई प्लॉट का आकार, एफएआर, सेटबैक, सड़क की चौड़ाई और सुरक्षा मानकों के आधार पर तय होगी। इससे री-डेवलपमेंट, बड़े प्लॉटों के एकीकरण और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट वाले क्षेत्रों में आधुनिक इमारतों की संभावनाएं बढ़ेंगी। हालांकि शहरी विशेषज्ञों ने सुरक्षा, यातायात और बुनियादी ढांचे पर इसके प्रभाव को लेकर प्रशासनिक तैयारी पर सवाल भी उठाए हैं।