स्वामी गोविंद देव गिरी ने यह भी स्पष्ट किया कि रामलला के दानपात्र (हुंडी) में आने वाले चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से उनका कभी सीधा संबंध नहीं रहा। यह काम स्थानीय न्यासी और संबंधित अधिकारी बैंक के साथ तय मानक प्रक्रिया (SOP) के तहत संचालित करते रहे हैं।