'तीजन बाई, इंडिया' के पते पर जब पेरिस से भेजी गई एक चिट्ठी उन तक सीधे पहुंच गई

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जो आवाज़ कभी समूचे महाभारत को जीवंत कर देती थी, अब मौन हो चुकी है. आज वह तंबूरा नि:शब्द है और पंडवानी की कथा थम गई है. पंडवानी की आत्मा तीजन बाई, दुनिया के रंगमंच से विदा ले चुकी हैं.