जो आवाज़ कभी समूचे महाभारत को जीवंत कर देती थी, अब मौन हो चुकी है. आज वह तंबूरा नि:शब्द है और पंडवानी की कथा थम गई है. पंडवानी की आत्मा तीजन बाई, दुनिया के रंगमंच से विदा ले चुकी हैं.